12 वीं सदी की अनसुलझी गुत्थी — इंग्लैड के वुलपिट गांव के हरे बच्चे कौन थे ?

 नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपके अपने ब्लॉग रीड मी भारत में, तो दोस्तों आज का लेख इतिहास की एक बहुत ही विचित्र और रहस्यमयी  घटना से संबंधित है एक ऐसी घटना जिसे सुनते ही लोगों के मन मे डर और आश्चर्य की भावना उत्पन्न हुई। तो चलिए दोस्तो चलते हैं और आपको बताते हैं कि आखिर वह कौनसी घटना थी।


तो दोस्तों यह रहस्यमयी घटना आज से लगभग 10 सदी पुरानी अर्थात् 12 वीं सदी की घटना है जो इंग्लैंड के वुलपिट गाँव में घटित हुई। एक ऐसा दौर जब संपूर्ण विश्व धर्मयुद्ध, अंधविश्वासों और अनेकों प्रकार की रूढ़ियों से जूझ रहा था ठीक उसी समय इंग्लैंड के वुलपिट गाँव में एक रहस्यमयी घटना घटित होती है एक ऐसी घटना जो उस गाँव के इतिहास को हमेशा के लिए बदल देती है यह घटना केवल एक कहानी या किस्सा नहीं थीं बल्कि एक दस्तक थी जो किसी और दुनिया से आए थे गाँव के कोने में एक पुरानी खाई या गड्ढा था जिसे गाँव के लोग वुलपिट कहा करते थे एक दिन इसी खाई के पास ग्रामीणों को एलियन की तरह दिखने वाले दो बच्चे दिखाई देते हैं जिनमें एक लड़की तथा दूसरा लड़का था ये दोनों ही बच्चे दिखने में तो आम मनुष्य की तरह ही थे लेकिन इनकी त्वचा गहरे हरे रंग की थी जिसे देखकर लगता था कि ये बच्चे पृथ्वी के नहीं बल्कि किसी अन्य ग्रह से आए हों इन विचित्र प्रकार के बच्चों को देखकर पहले तो गाँव वाले भी डर जाते हैं लेकिन बाद में गाँव के कुछ लोग बच्चों के पास जाते है और देखते है कि बच्चे बहुत कमजोर लग रहे थे शायद वह बहुत भूखे थे इसके अलावा इन बच्चों के कपड़े भी बहुत अलग थे जो उस समय की किसी भी संस्कृति या सभ्यता से बिल्कुल भी मेल नहीं खाते थे लेकिन आश्चर्य की बात तो यह थी कि ये बच्चे संवाद के लिए जिस भाषा का उपयोग कर रहे थे वह भी किसी भाषा से मेल नही खा रही थी ऐसा लग रहा था जैसे ये बच्चे एक ऐसी भाषा बोल रहे हैं जो इस पृथ्वी पर बोली ही नहीं जाती है।

कुछ भी हो लेकिन इन बच्चों की हालत को देखकर पता चल रहा था कि ये बच्चे बहुत भूखे है इसलिए लोगों ने इन बच्चों को रोटी फल मांस आदि खाने की वस्तुएँ दी लेकिन इनमें से कोई भी चीज इन बच्चों ने नहीं खायी ऐसा प्रतीत होता था जैसे ये बच्चे इन सभी खाद्य सामग्री से अनजान थे लेकिन कुछ समय बाद किसी व्यक्ति द्वारा इनको हरे सेम की फली दी जाती है । हरे सेम की फलियों को देखकर इनके चेहरे पर एक अलग खुशी व चमक आ जाती है और ये बच्चे इन हरे सेम को कच्चा ही खाने लगते है इन रहस्यमयी बच्चों को देखकर गाँव के लोग आश्चर्यचकित रह जाते है इसके बाद गाँव के लोग तय करते है कि अब इन बच्चों को गाँव में ही रहने दिया जाए ।

कुछ दिन गुजरने के बाद इन बच्चों की हरी त्वचा फीकी पड़ने लगती है और उनकी त्वचा का रंग मानवों की त्वचा जैसा होने लगता है समय गुजरता है और एक दिन दोनों बच्चों में से लड़का बीमार पड़ जाता है और एक दिन उसकी मृत्यु हो जाती है लड़के की मृत्यु के बाद लड़की अकेली रह जाती है वह अपनी दृष्टि हमेशा उस दिशा की ओर गड़ाए रखती थी जहाँ से वो दोनों आए थे।

 समय के साथ लड़की नए जीवन और नई संस्कृति में घुल मिल जाती है वह जल्दी ही अंग्रेजी बोलना भी सीख लेती है इतना ही नहीं , कुछ समय बाद वह लड़की पास के ही एक शहर लेविनम के एक व्यक्ति से शादी कर लेती है लेकिन कुछ समय बाद उसके पति की मृत्यु हो जाती है और वह विधवा हो जाती है ।

वह लड़की अब तक अंग्रेजी भाषा के पूर्ण ज्ञान को प्राप्त कर लेती है और अच्छी तरह से अंग्रेजी बोलना सीख जाती है इसके बाद वह स्वयं अपनी कहानी लोगो को बताती है जिसे सुनकर लोग आश्चर्य में पड़ जाते हैं ।

लड़की बताती है कि वह और उसका भाई सेंट मार्टिन नामक जगह से आए आए हैं जहाँ पर उनके जैसे अनेक लोग रहते हैं तथा इन लोगों की त्वचा भी  हरे रंग की होती है लड़की बताती है कि उनके यहाँ सूर्य जैसी कोई चीज नहीं होती है जिससे वहाँ पर रोशनी बहुत कम तथा गहरे हरे रंग की होती है।

जब लड़की से पूछा गया कि वो दोनों यहाँ तक कैसे पहुंचे तो उसने बताया कि एक दिन वह और उसका भाई अपने पिता के पशुओं को चरा रहे थे कुछ समय बाद उन दोनों को किसी दिशा से आती हुई घंटियों की अत्यंत सुरीली आवाज सुनाई पड़ती है वह दोनों भाई बहन उस आवाज का अनुसरण करते हुए उस जगह तक पहुंचते है जहाँ से वह आवाज आ रही थी वहाँ पहुंचकर वो देखते है कि वह आवाज पास की ही एक गुफा से आ रही थी वो दोनों उस गुफा में जाने का निर्णय करते है और गुफा के अंदर चले जाते है लेकिन कुछ समय बाद जब वो दोनों गुफा से बाहर निकलते है तो उनके आगे एक नई दुनिया मौजूद थी जिससे वह बिल्कुल अंजान थे इस नई दुनिया को देखकर वो दोनों अत्यन्त उत्साहित हुए तथा एक अनजाने डर का माहौल भी उनके मन में उत्पन्न हो चुका था ।

इस घटना के प्रमुख ऐतिहासिक स्रोत 

इस घटना का उल्लेख 12 वीं सदी के दो अंग्रेज़ इतिहासकारों विलियम ऑफ न्यूबर्ग और राल्फ ऑफ कॉग़ेशॉल ने अपनी पुस्तकों में किया है विलियम ऑफ न्यूबर्ग की किताब Historia Rerum Anglicanum में इन हरे बच्चो का विवरण विस्तार से मिलता है जिसे सबसे विश्वसनीय ऐतिहासिक स्रोत माना गया है। इसके अलावा 12 वीं सदी के एक और प्रमुख इतिहासकार राल्फ ऑफ कॉग़ेशॉल ने भी हरे बच्चो का विवरण अपनी पुस्तक Chronicon Anglicanum में दिया है जिसमें उन्होंने इन बच्चों को किसी " अज्ञात देश से आए हुए " बताया है हालांकि इन दोनों ही इतिहासकारों ने इस घटना को चमत्कार तथा रहस्यमयी रूप में प्रस्तुत किया है इन इतिहासकारों द्वारा अपनी अपनी पुस्तकों में इस घटना का उल्लेख करते हुए किसी भी प्रकार से वैज्ञानिक दृष्टिकोण को नहीं अपनाया गया।

इस घटना के संदर्भ में वैज्ञानिक दृष्टिकोण 

 इस घटना के संदर्भ में वैज्ञानिक कुछ तर्क देते है जो इस प्रकार है –

1.  वैज्ञानिक इन दोनों बच्चों को किसी गंभीर रोग से ग्रसित मानते हैं जिसके परिणामस्वरूप इन दोनों बच्चों की त्वचा हरे रंग की हो गई थी । 
2. वैज्ञानिक इन बच्चों को एनिमीया रोग से ग्रसित मानते है जिसमें शरीर में आयरन की कमी हो जाती है और धीरे धीरे त्वचा हरे रंग की हो जाती है।
3. वैज्ञानिक कहते हैं कि मध्यकालीन यूरोप में बहुत ज्यादा भुखमरी फैली हुई थी जिससे बच्चे लंबे समय तक भूखे रहे होंगे और त्वचा का रंग हरा पद गया होगा।
4. कुछ वैज्ञानिक बच्चों की हरी त्वचा का कारण जहरीले तत्वों को भी मानते हैं जिनमें आर्सेनिक या सल्फर प्रमुख है ।
5. वैज्ञानिकों का मानना है कि बच्चे लंबे समय तक अंधेरी या घनी जगहों पर रहे होंगे जिससे उनके शरीर में विटामिन D की कमी हो गई और उनकी त्वचा हरे रंग की हो गई।
वैज्ञानिक इन बच्चों के एलियन होने , दूसरी दुनिया से आना या फिर भूमिगत रहस्यमयी लोक जैसी अवधारणा को पूर्ण रूप से खारिज करते हैं।

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